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Politics 

अरविन्द “आप” को क्या हो गया?

AC कमरों और गाडियों का आराम छोड़कर जंतर मंतर पर बिना गद्दे और तकिये के बिताये वो दिन सचमुच यादगार है. ये वो दिन थे जब नींद 16 घंटे के बजाय 70 घंटे काम करने के बाद आती. और फिर 2 अगस्त की वो शाम जब अन्ना जी ने राजनैतिक विकल्प देने की घोषणा कर दी. टीवी पर खबर देखते ही पत्नी का फ़ोन आया. उसने कहा “तुरंत वापस आ जाओ. हमें बेवकूफ बनाया गया है. आन्दोलन के नाम पर हमारी भावनाओ से खेलकर ये लोग राजनीति कर रहे है”….

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टकराव के कारण और समाधान

मेरी समझ में यह टकराव व्यक्तियो के बीच नहीं बल्कि परिवर्तन के लिए अपनाये जा रहे दो मार्गो के बीच का टकराव है. शीघ्रातिशीघ्र परिवर्तन का मार्ग जिसके दीर्घकाल में विफल होने का खतरा हो या दीर्घकालीन परिवर्तन का मार्ग जिसमे शीघ्र सफलता मिल पाना मुश्किल हो

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