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49 days of aap Politics 

बिजली दरो में 50% कटौती, बिजली कंपनियों के ऑडिट का आदेश






सरकार बनने के चौथे ही दिन आम आदमी सरकार ने बिजली और पानी से सम्बंधित अपने सभी मुख्य चुनावी वादों को पूरा कर दिया. आज बिजली दरो में 50% की कटौती की घोषणा के साथ बिजली कंपनियों के ऑडिट की घोषणा भी कर दी गई. आम आदमी सरकार के मंत्री देर रात तक रैन बसेरो का दौरा करते देखे गए.






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Politics 

30 दिसंबर – भ्रष्टाचार ख़त्म, दिल्ली वालो को मुफ़्त पानी






On the third day of 49 days of AAP government the key poll promise of free water was fulfilled. Auto drivers got permit to operate in Gurgaon and Noida. 1 crore compensation was announced for the family of police constable who was killed by mafia. Delhi was reported as corruption free by News Nation.











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49 days of AAP - first day Politics 

वो 49 दिन – पहले ही दिन लिए कुछ अहम् फैसले






दिल्ली में आज से ठीक एक साल पहले 28 दिसंबर को अरविन्द केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, केजरीवाल सरकार दिल्ली में मात्र 49 दिन सत्ता में रही लेकिन इन 49 दिनों में उन्होंने वो सब कर दिखाया जो इतिहास में किसी सरकार ने नहीं किया. #49DaysOfAAP पर आधारित शृखला में पहले दिन पर पहला लेख. आज से 14 फ़रवरी तक रोजाना एक लेख प्रकाशित होगा.











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ऑपरेशन केजरीवाल – केजरीवाल का खौफ






दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की सरकार बनने की अभी खबरे ही आई थी और हर तरफ उथल पुथल मच गई. आज तक के द्वारा एक स्टिंग ऑपरेशन किया गया – ऑपरेशन केजरीवाल. खुफिया कैमरे ने कइयो की पोल खोल दी. कही पुरानी फाइलो से दस्तावेज फाड़े जा रहे थे, तो कई केजरीवाल के आने से पहले अपना ट्रान्सफर करने की कोशिशे. यहाँ तक की एक अफसर ने पूर्व मुख्यमंत्री शिला दीक्षित की प्राइवेट ठेकेदारों से सांठ गाँठ की बात कैमरे पर कबुली.











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वो 49 दिन – आइये मिलकर इतिहास लिखे






एक प्रयास उन 49 दिनों की यादो को कागज पर उतारने का। 28 दिसंबर 2014 से 14 फ़रवरी 2015 तक रोजाना एक लेख लिखने का जिसमे उस दिन से ठीक एक साल पहले वाले दिन के घटनाक्रमो का ब्यौरा होगा। यह एक प्रयास है उन 49 दिनों की यादे ताजा करने का। अकेले यह सब कर पाना मुश्किल है लेकिन प्रयास करूँगा। और यदि आप हाथ बटाएं तो हम सब मिलकर उस सुनहरे इतिहास को आसानी से कागज पर उतार सकते है। यदि आप किसी भी एक दिन के विषय में लेख लिखने का भी जिम्मा ले तो कुछ लोग मिलकर इसे आसानी से पूरा कर सकते है। मुझे विश्वास है की भविष्य में इन सभी लेखो को जोड़कर एक किताब प्रकाशित हो सकती है – “वो 49 दिन”।











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Beyond Science 

अविष्कार के प्रयास में पहला विफल प्रयोग






शायद उस समय मैं 7 वीं कक्षा में था, 8 वीं में नहीं था ये पक्का याद है। निश्चित उस ज़माने में पढाई का सिलेबस आज के मुकाबले काफी सरल हुआ करता था। लेकिन सिलेबस के अलावा सीखने को बहोत कुछ था जो शायद आजकल कम हो गया है। महाराष्ट्र में गणपति स्थापना और 10 दिन बाद उसका विसर्जन होता है। गली गली में गणपति स्थापना होती है। भगवान की मूर्ति के पीछे एक चक्र अक्सर होता है जो 3 वाल्ट की बैटरी से चलता है। हमारे बचपन में उस…






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Politics 

केजरीवाल के नाम से कांपते है भ्रष्ट – न्यूज़ नेशन का सर्वे






आज कुछ पुराने विडियो देख रहा था. उनमे एक विडियो दिखाई दिया न्यूज़ नेशन का, तारीख थी 30 दिसंबर 2013 और विडियो का टाइटल था Aam Aadmi Party’s Reality Test. पहले तो गुस्सा आया इस मीडिया हाउस पर. २८ दिसंबर को अरविन्द केजरीवाल ने शपथ ली और 30 दिसंबर को रियलिटी टेस्ट?











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विधायक प्रह्लाद गुंजल का गालियों एवं धमकी युक्त ऑडियो






विधायक महोदय का यह ऑडियो बाहर लिक करने वाले डॉक्टर की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी. लेकिन क्या हम आश्वस्त है की वो डॉक्टर इसके बाद सुरक्षित रहेगा? क्या वो अपनी सरकारी नौकरी जारी रख पायेगा या उसे अब सत्ता धारी दल का रोष झेलना पड़ेगा? क्या हम इस ऑडियो को सुन, विधायक महोदय की इन वाह्यात और घिनौनी बातो पर हंस कर इसे भुला देंगे? सवाल बड़ा है और निश्चित कई और सवाल खड़े करता है?











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Politics 

क्या उसका आम होना ही खास है?






दुबई में एक कार्यक्रम के लिए आयोजको के खर्च पर अरविन्द केजरीवाल ने बिज़नेस क्लास में यात्रा की थी। उस दिन यह खबर कई प्रमुख टीवी चैनल पर न सिर्फ दिखाई गई बल्कि प्राइम टाइम में इस पर पर बहस भी हुई। कोब्रा पोस्ट के इस खुलासे में बिजनेस क्लास नहीं बल्कि निजी विमान (Chartered Plane) के उपयोग का खुलासा है जो उस यात्रा से कई गुना महंगा होता है, एक नहीं सैंकड़ो नाम है, ऐसे नाम जो सत्ता में है या रह चुके है, जिन यात्राओ का खर्च किसने उठाया यह साफ नहीं है, जिसमे चुनाव आयोग के नियमो की अवहेलना का जिक्र है, जिसमे पारिवारिक सदस्यों के ऐशो आराम के लिए जनतांत्रिक पदों के दुरुपयोग का खुलासा है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है की लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ इसपर न कोई प्रश्न पूछता है न बहस कराता है। केजरीवाल में ऐसी क्या खास बात है जो इन नेताओ में नहीं। क्या उसका आम होना ही खास है?











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