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केजरीवाल के नाम से कांपते है भ्रष्ट – न्यूज़ नेशन का सर्वे

Photo - ndtv.com
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आज कुछ पुराने विडियो देख रहा था. उनमे एक विडियो दिखाई दिया न्यूज़ नेशन का, तारीख थी 30 दिसंबर 2013 और विडियो का टाइटल था Aam Aadmi Party’s Reality Test. पहले तो गुस्सा आया इस मीडिया हाउस पर. 28 दिसंबर को अरविन्द केजरीवाल ने शपथ ली और 30 दिसंबर को रियलिटी टेस्ट? अच्छे दिनों का वादा कर केंद्र में मोदी सरकार बने हुए 6 महीने से जादा हो गए और किसी मीडिया ने उनका रियलिटी टेस्ट नहीं लिया. कोई मीडिया नहीं पूछ रहा कहा है 15 लाख, कहा है काला धन के आरोपी, कहा कम हुई महंगाई, कितना कम हुआ भ्रष्टाचार, कितनी मिली नौकरिया?
खैर ये सारे सवाल आम आदमी के लिए होते है. आयोजको द्वारा दिए हुए टिकट से केजरीवाल बिजनेस क्लास में दुबई जाये तो सभी चैनल्स पर प्राइम टाइम में बहस होती है, और जब कोबरा पोस्ट सैंकड़ो नेताओ द्वारा अपने परिवार के साथ निजी विमान द्वारा की यात्राओ का खुलासा करे तो कोई चैनल उस पर खबर तक नहीं बनाता.
खैर उम्मीद नहीं थी की 2 दिन में केजरीवाल कुछ भी कर पाए होंगे लेकिन यह विडियो देखा. यह विडियो आम आदमी पार्टी द्वारा बनाया हुआ नहीं बल्कि न्यूज़ नेशन चैनल द्वारा प्रसारित एक शो की रिकॉर्डिंग है.

केजरीवाल सरकार बनने के महज दो दिनों बाद किये गए इस रियलिटी टेस्ट को देखे तो एक ही बात समझ आती है – केजरीवाल के नाम से कांपते है भ्रष्ट. 2 दिनों में उसने न कोई नया कानून बनाया, न कोई अफसर बदले, न व्यवस्था में कोई बदलाव किया न नियमो में और न ही कोई नए उपकरण लगाये भ्रष्टो को पकड़ने के लिए. फिर भी भ्रष्टाचार बिलकुल ख़त्म?
एक और खास बात इस विडियो में दिखाई दी – ट्रांसपोर्ट कार्यालय के बाहर बड़े अफसरों को रिश्वत पहुँचाने की दलाली करने वाले लोगो का विडियो है. हर कोई कह रहा है पार्टी आ गई, सरकार आ गई, अब नहीं चलेगा ये सब. लेकिन इन लोगो के रोजगार का क्या? अफसरों तक रिश्वत पहुँचाना और उसमे से एक छोटा सा हिस्सा खुद रख लेना यही तो इनका रोजगार है. इनका रोजगार बंद हो गया लेकिन फिर भी किसी की बातो से ये नहीं लगा की वो केजरीवाल से नाराज है.
यह विडियो वास्तव में दिल को छू गया. एक आम आदमी जिसका केवल नाम पूरी दिल्ली से भ्रष्टाचार को ख़त्म कर देता है। भ्रष्टाचार, वो बीमारी जो दीमक की तरह इस देश को ख़त्म होने की कगार पर ले आई. सोचिये ये आदमी अगर 5 साल तक दिल्ली में सरकार चलाये? जब ये खुद कानून बना पाए, जब ये खुद ईमानदार अफसरों को तरक्की और भ्रष्टो को सजा दे पाए, जब ये खुद जनता के पैसे को जनता के लिए खर्च कर पाए?

अच्छे दिन देख लिए, सरकार बने 6 महीने हो गए. मायूसी के बजाय अब देश में उत्साह जरुर है लेकिन आम आदमी की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया. अब सच्चे दिनों को देखने का मौका है – 5 साल केजरीवाल का मौका है.

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