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2 जनवरी – विश्वास मत हासिल किया

2 जनवरी 2014, वो दिन जब आम आदमी पार्टी को विधान सभा के पटल पर विश्वास मत हासिल करना था. पुरे देश के मीडिया में चर्चा का विषय था – क्या यह अनोखी सरकार विश्वासमत हासिल कर पायेगी? सरकार के पिछले 5 दिनों के प्रदर्शन ने राजनैतिक गलियारों में हडकंप मचा दिया था. कांग्रेस के न गिलते बन रही थी न उगलते. मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में अन्ना हजारे ने कहा की सरकार निश्चित विश्वास मत हासिल करेगी. केजरीवाल अच्छा काम कर रहा है और इस सरकार को यदि किसीने गिराया तो दोबारा होने वाले चुनावो में जनता उसको सबक सिखाएगी (विडियो).

आज विधान सभा की कारवाही पर पुरे देश की नज़रे टिकी हुई थी, सभी मीडिया चैनल इसका सीधा प्रसारण कर रहे थे. मनीष सिसोदिया ने विश्वास प्रस्ताव रखते हुए कहा की हमने सरकार बनाने से पहले दिल्ली की जनता से पूछा. हमारे पास नैतिक जनादेश है, लेकिन सदन में सख्या नहीं है. विश्वास मंत पर विधानसभा करीबन साढे चार घंटे बहस चली. बहस के दौरान कांग्रेस की औरसे अरविन्द लवली ने कहा की जब तक यह सरकार जनता की हित में काम करेगी हम समर्थन देते रहेंगे. बीजेपी की और से डॉ हर्षवर्धन ने कहा की जिस कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ यह पार्टी बनी थी उसी का समर्थन इन्होने ले लिया. जब यह सरकार कांग्रेस के समर्थन से चलेगी तो क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ेगी?

अंत में अरविन्द केजरीवाल ने बहस में उठे प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा की मैं सदन को विश्वास दिलाता हु यह सरकार भ्रष्टाचार चाहे वो पिछले 15 साल के कांग्रेस शाशन में हुआ हो, दिल्ली नगर निगम में हुआ हो या आम आदमी पार्टी का कोई भी विधायक या मंत्री भविष्य में करे, उसे सख्ती के साथ निबटेगी, किसी को बक्शा नहीं जायेगा. इसके बाद डॉ हर्षवर्धन द्वारा आम आदमी पर उठाये सवाल के जवाब में, अरविन्द केजरीवाल ने आम आदमी की परिभाषा सदन के सामने रखी. उन्होंने कहा की इस देश का आम आदमी ईमानदारी से जीना चाहता है. हर वो आदमी जो भ्रष्टाचार के खिलाफ है, आम आदमी है. चाहे वो किसी रैन बसेरे में रहता हो या ग्रेटर कैलाश के किसी बंगले में.

उन्होंने सदन से कहा – “हम सबको सोचना होगा- ऐसी क्यों जरुरत पड़ी की हम जैसे आम आदमी जिन्होंने कभी नहीं सोचा था की वो चुनाव लड़ेंगे उन्हें राजनीति में उतरना पड़ा. इस देश के आम आदमी की जरूरते बहोत छोटी है. लेकिन हम पिछले 67 सालो में उसे ये तक नहीं दे पाए. इस सबके लिए अरबो खरबो खर्च हुआ लेकिन उस आम आदमी के हालात में बदलाव नहीं आया. अब वो पूछ रहा है की कहा गए वो रुपये?”

“इस देश की राजनीति ख़राब हो चुकी है, भ्रष्ट हो चुकी है उसका अपराधीकरण हो चूका है. जब इस देश के आम आदमी का जीना दूभर हो गया तब लाखो करोडो आम आदमीयो को सड़क पर उतरना पड़ा, उन्होंने कहा अपने नेताओ को की एक सख्त कानून बनाओ. लेकिन इस देश के नेताओ ने आम आदमी को ललकारा – कहा की कानून चाहते हो तो चुनाव लड़ो और आओ संसद में. नेता भूल गए की इस देश का आम आदमी हल जोतता है, कपडे बुनता है, ऑटो चलाता है, मकान बनाता है, रिसर्च भी करता है ये सब नेता नहीं करता. इस देश के आम आदमी ने तय कीया की अब चुनाव लड़ेंगे, हारे या जीते, लड़ेंगे जरुर. किसी ने नहीं सोचा था जित पाएंगे. लेकिन कहते है न जिसका कोई नहीं होता उसका इश्वर होता है, वो असहाय का साथ देते है – 8 दिसंबर को चमत्कार हुआ, आम आदमी जित गया”.

“दिल्ली के आम आदमी ने इस देश से भ्रष्ट राजनीति को उखाड़ फेंकने की दिशा में पहला कदम रखने की जुर्रत की है. आज इस देश के सदन के सामने प्रश्न है – कौन कौन इमानदार राजनीति के साथ खड़ा होना चाहता है.”

फिर उन्होंने वो 18 मुद्दे पढ़ कर सुनाये जिन पर उन्होंने कांग्रेस और बीजेपी का समर्थन माँगा था और कहा की मैं अपनी पार्टी के लिए समर्थन माँगने नहीं आया, मैं अपनी सरकार के लिए भी समर्थन मांगने नहीं आया. मैं 3 प्रश्न रखना चाहता हु.

आज इस सदन के सामने प्रश्न है की राजनीति को बदलने की आम आदमी की इस लड़ाई में कौन कौन सदस्य आम आदमी के साथ खड़ा है?

आज इस सदन के सामने प्रश्न है की कौन देश में सच्ची और इमानदार राजनीति स्थापित करने की लड़ाई के साथ खड़ा होना चाहता है?

और मैंने इस सदन के सामने 17 मुद्दे रखे है, जो आम आदमी की समस्याए है, प्रश्न है कौन कौन इन समस्याओ को सुलझाना चाहता है?

केजरीवाल के इस भाषण को मीडिया ने न सिर्फ सीधा प्रसारित किया, उसपर बहस भी हुई और सराहा गया.

इसके बाद विश्वास मत प्रस्ताव पर मत विभाजन हुआ जिसमे, कांग्रेस और RJD के विधायको के अलावा एक निर्दलीय विधायक के समर्थन के साथ केजरीवाल ने विश्वास मत प्राप्त कर लिया. केजरीवाल ने इसे दिल्ली की जनता की जित बताया, ईमानदारी की जित बताया.

संजय निरुपम के बाद आज महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर भी आप का प्रभाव दिखाई दिया. अपने बंगले के साजो सजावट में खर्च हुए सरकारी पैसे में से 27 लाख सरकार को लौटने का उन्होंने निर्णय लिया (विडियो). मीडिया में लेख छपा – अरविन्द लवली और डॉ हर्षवर्धन को केजरीवाल का आभारी होना चाहिए. केजरीवाल की इस नयी तरह की राजनीति ने देश ही नहीं बल्कि दुनिया का ध्यान आकर्षित किया और केजरीवाल के कारण ये दोनों भी चर्चा में आने लगे.

विश्वास मत के लिए घर से विधानसभा तक का सफ़र केजरीवाल ने अपनी कार में हर ट्राफिक सिग्नल पर रुकते हुए एक आम आदमी की तरह तय किया. इस दौरान कही कोई उनकी तस्वीर खिचता तो कोई उनसे हाथ मिलाता. यह सब मीडिया के कैमेरो में कैद हुआ. दिल्ली के लिए यह सब एक अनोखा मंजर था – एक आम आदमी जो उनका मुख्यमत्री था.

आप की इस कामयाबी ने आई आई एम् का भी ध्यान खीचा. आई आई एम् इंदौर के कृष्णन ने संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल पर कहा, ‘आम आदमी पार्टी ने बेहद कम वक्त में कामयाबी अर्जित की है। इस कामयाबी से प्रबंधन के कई रोचक सबक सीखे जा सकते हैं। निश्चित तौर पर हम अपने विद्यार्थियों से कहेंगे कि वे खुद देखें कि इस पार्टी की कामयाबी से क्या सीखा जा सकता है।’

विधान सभा में केजरीवाल का भाषण

 

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