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24 नवम्बर 2012 – एक ऐतिहासिक दिवस

From facebook.com/AamAadmiParty
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आज से ठीक 2 साल पहले 24 नवम्बर 2012 को करीबन 330 आम आदमीयो ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखकर दिया था की हम सब मिलकर एक राजनैतिक पार्टी बना रहे है। नाम रखा गया – आम आदमी पार्टी। इन संस्थापक सदस्यों ने पार्टी का संविधान सर्वसम्मति से पारित किया और सर्वसम्मति से पार्टी की राष्ट्रिय कार्यकारिणी का चयन किया। चुनाव आयोग की औपचारिकता इन संस्थापक सदस्यों ने पूरी की लेकिन यह पार्टी देश भर के लाखो आंदोलनकारियो ने मिलकर बनाई थी। पार्टी की स्थापना के लिए संविधान दिवस 26 नवम्बर का दिन चुना गया था। घोषणा की गई की इस दौरान पार्टी की सदस्यता लेने वाले सभी सदस्यो को पार्टी का संस्थापक सदस्य माना जायेगा। 26 नवम्बर को लाखो लोगो के बीच जंतर मंतर पर आम आदमीओ द्वारा बनाई गई इस आम आदमी पार्टी की स्थापना की गई। अलग अलग राज्यो से आये आंदोलनकारी अपने अपने राज्य के लिए क्रांति की मशाल लेकर रवाना हुए।

राजनैतिक विकल्प क्यो?

पूर्व गृह मंत्री भारत सरकार – सुशील कुमार शिंदे के एक बयान से शुरुवात करते है।

” भारतीयो की याददाश्त कमजोर है. बोफोर्स को भूल गए, कोयला घोटाले को भी भूल जायेंगे”

मंत्रीजी के बयान पर गुस्सा तो बहोत आया था लेकिन उन्होने बिल्कुल सच कहा था। हमारी याददाश्त कमजोर हो न हो, हमें किस समय क्या याद करना है यह कोई और ही तय करता है। विश्वास नहीं तो यह लेख पढ़िए।

खैर मैं याद दिलादु –

लगातार एक के बाद एक घोटाले बाहर आ रहे थे। कॉमन वेल्थ खेल घोटाला, 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कोयला घोटाला – इन तीन घोटालो में देश का कुल 4 लाख 30 हज़ार करोड़ रूपया भ्रष्ट नेताओ ने लूट लिया। एक आम आदमी के लिए यह समझना मुश्किल है के ये पैसा कितना होता है। पुरे देश की गरीब जनता को फ़ूड सब्सिडी और भोजन की गारंटी के लिए के लिए एक साल में 90 हज़ार करोड़ रूपया खर्च होता है। इस देश में जहा हज़ारो लोग हर साल भुकमरी से मरते है, जितने पैसे से पुरे देश को 5 साल तक भोजन खिलाया जा सकता है, उतना पैसा चंद नेताओ और अफसरो नेकेवल 3 घोटालो में लूट लिया। वही भ्रष्ट नेता संसद में बैठते है और आपके लिए नीतिया बनाते है। जब लुटेरे खुद सत्ता में बैठे हो तो आपको न्याय कौन देगा? कौन इनपर कारवाही करेगा?

देश की संपत्ति की इस खुली लूट को रोकने के लिए, दोषियो को सजा दिलाने के लिए एक निष्पक्ष संस्था “लोकपाल” और एक सख्त कानून – “जनलोकपाल कानून” बनाने की मांग को लेकर 74 साल का एक बुजुर्ग अन्ना हज़ारे आमरण अनशन पर बैठा। बार बार आंदोलन हुआ। इस आंदोलन के दौरान हमारे द्वारा चुने हुए नेताओ कई शर्मनाक बयान दिए। “जनलोकपाल कानून” पर लोकसभा हुयी बहस को दुबारा देखे। सभी पार्टियो के नेता, अन्ना हज़ारे और आंदोलन पर बैठे लाखो लोगो की खिल्ली उड़ा रहे थे। उसके बाद किस तरह सरकार ने अन्ना हज़ारे को धोका दिया वो भी याद करे।

25 जुलाई 2012 को आर पार की लड़ाई शुरू हुई – Final War Against Corruption। अन्ना का स्वास्थ्य ठीक नहीं था इसलिए इस बार अनशन पर बैठे अरविन्द केजरीवाल, गोपाल राय, मनीष सिसोदिया और करीबन 700 आंदोलनकारी। डायबिटीज से ग्रसित अरविन्द केजरीवाल ने किस तरह अनशन किया इस पर लिखा यह लेख अवश्य पढ़े। 7 दिनो तक डायबिटीज रोगी केजरीवाल अपनी जान जोखिम में डाल अनशन करता रहा लेकिन सरकार के कानो पर जूं तक नहीं रेंगी। इसके बाद अन्ना हज़ारे भी अनशन पर बैठ गए। लगातार 10 दिन अनशन चलने के बावजूद सरकार की और से कोई पहल नहीं हुई। इसके बाद कुछ समाजसेवको ने आग्रह किया की अब अनशन ख़त्म किया जाए और देश को एक राजनैतिक विकल्प दिया जाए। अन्ना हज़ारे ने देश की जनता से राय मांगी, सभी टीवी चैनल जनता की राय लगातार दिखा रहे थे। आखिर अन्नाजी ने आंदोलन को समाप्त कर देश को एक राजनैतिक विकल्प देंने की घोषणा कर दी।

कुछ आंदोलनकारी मित्रो की राय थी की राजनीति गन्दी है, हमें इसमे नहीं उतरना चाहिए।  लेकिन क्या कोई और विकल्प था? लम्बे समय से चल रहे आंदोलनो का हाल हमें नहीं भूलना चाहिए।  गंगा की सफाई की मांग को लेकर अनशन पर बैठे स्वामी निगमानंद शहीद हो चुके है। और दुःख की बात है उनकी शहादत के बावजूद हालात नहीं बदले। और शर्म की बात है उनकी शहादत को नेता ही नहीं हम भी भूल गए। इस देश में जाने कितने आंदोलनकारी या तो आंदोलन करते करते शहीद हो जाते है या मार दिए जाते है।

हालात बदलने का एक ही रास्ता है और वो है राजनैतिक परिवर्तन। हर बड़ी पार्टी कभी न कभी सत्ता में रही है और जनता को सिर्फ धोका ही मिला है। अन्ना कहते थे इस देश में पैसे से सत्ता और सत्ता से पैसे का चक्र चल रहा है. इसे तोडना होगा और अब जनता को सत्ता अपने हाथोमें लेकर सच्चा लोकतंत्र स्थापित करना होगा।

इस देश में पहले भी आंदोलन से राजनैतिक विकल्प का इतिहास रहा है। लेकिन केवल राजनैतिक विकल्प देना काफी नहीं। आवश्यकता है राजनीति को बदलने की। तय किया गया की एक अलग तरह की वैकल्पिक राजनीति की स्थापना की जायेगी। राजनैतिक विकल्प और वैकल्पिक राजनीति दो भिन्न भिन्न शब्द है और इनके भिन्न भिन्न अर्थ। इस राजनैतिक विकल्प से जुड़े हर व्यक्ति को वैकल्पिक राजनीति की साफ समझ होना आवश्यक है।

वैकल्पिक राजनीति पर मेरी समझ पर आधारित एक लेख 26 नवम्बर (आम आदमी पार्टी के स्थापना दीवस) को प्रकाशित करूँगा। पढियेगा जरूर।

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